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Cricket: टीम इंडिया का चीफ सिलेक्टर बनने के लिए क्या चाहिए योग्यता? जानिए BCCI के नियम और चयन प्रक्रिया

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | टीम इंडिया का चीफ सिलेक्टर बनने के लिए कौन-कौन सी योग्यताएं जरूरी हैं? जानिए BCCI के नियम, चयन प्रक्रिया और अजीत अगरकर के इस पद तक पहुंचने की पूरी जानकारी।

7 सितंबर। भारतीय क्रिकेट टीम के लिए खिलाड़ियों का चयन करना जितना महत्वपूर्ण है, उतनी ही अहम भूमिका उस चयन समिति की होती है जो टीम इंडिया के लिए खिलाड़ियों के नाम तय करती है। चयन समिति के चेयरमैन यानी चीफ सिलेक्टर के कंधों पर भारतीय क्रिकेट के भविष्य से जुड़े कई बड़े फैसलों की जिम्मेदारी रहती है। यही वजह है कि इस पद के लिए केवल पूर्व क्रिकेटर होना पर्याप्त नहीं माना जाता। BCCI ने राष्ट्रीय चयनकर्ता बनने के लिए कुछ स्पष्ट पात्रता मानक निर्धारित किए हैं।

फिलहाल अजीत अगरकर भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम की सीनियर चयन समिति के चेयरपर्सन हैं। जुलाई 2023 में उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अब उनके कार्यकाल को लेकर आगे क्या फैसला होता है, इस पर क्रिकेट जगत की नजर बनी हुई है। अगरकर के कार्यकाल के आगे बढ़ने या नए चेहरों को मौका मिलने की स्थिति में BCCI की निर्धारित पात्रता सबसे महत्वपूर्ण आधार होगी।

चीफ सिलेक्टर बनने के लिए सबसे पहले क्या जरूरी है?

राष्ट्रीय चयनकर्ता के पद के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति का क्रिकेट से पूरी तरह संन्यास लिया होना जरूरी है। BCCI के निर्धारित मानकों के अनुसार उम्मीदवार के संन्यास को कम से कम पांच साल पूरे होने चाहिए।

इसका मतलब यह है कि कोई ऐसा खिलाड़ी जो अभी सक्रिय रूप से क्रिकेट खेल रहा है या हाल ही में क्रिकेट से संन्यास लिया है, वह तत्काल राष्ट्रीय चयनकर्ता के पद के लिए पात्र नहीं माना जाएगा।

कितने मैच खेलने का अनुभव होना चाहिए?

BCCI ने उम्मीदवार के क्रिकेट अनुभव के लिए भी स्पष्ट मानक बनाए हैं। इनमें से निर्धारित किसी एक मानक को पूरा करना जरूरी होता है।

उम्मीदवार ने कम से कम 7 टेस्ट मैच खेले हों।

या उम्मीदवार ने कम से कम 30 प्रथम श्रेणी मैच खेले हों।

या फिर उम्मीदवार ने कम से कम 10 वनडे अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हों और उसके साथ कम से कम 20 प्रथम श्रेणी मुकाबलों का अनुभव भी हो।

इस तरह देखा जाए तो BCCI ने अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट दोनों के अनुभव को राष्ट्रीय चयनकर्ता बनने की पात्रता में महत्व दिया है।

BCCI की समितियों से जुड़ा नियम भी महत्वपूर्ण

राष्ट्रीय चयनकर्ता के लिए क्रिकेट खेलने का अनुभव ही एकमात्र कसौटी नहीं है। BCCI के नियमों में उसकी समितियों से जुड़ा अनुभव भी शामिल है।

यदि कोई व्यक्ति BCCI की किसी क्रिकेट समिति का लगातार पांच वर्ष या उससे अधिक समय तक सदस्य रह चुका है, तो वह राष्ट्रीय चयन समिति में सदस्य बनने के लिए पात्र नहीं माना जाता।

इस नियम का मकसद चयन प्रक्रिया में लंबे समय तक एक ही व्यक्ति के बने रहने की स्थिति को सीमित करना और चयन व्यवस्था में उचित बदलाव की गुंजाइश बनाए रखना है।

चीफ सिलेक्टर का चयन कैसे होता है?

जब BCCI राष्ट्रीय चयनकर्ता के पद के लिए आवेदन आमंत्रित करता है तो इच्छुक और योग्य पूर्व क्रिकेटर आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद प्राप्त आवेदनों की जांच की जाती है।

पात्रता पूरी करने वाले उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया जा सकता है। चयन प्रक्रिया में व्यक्तिगत इंटरव्यू भी शामिल हो सकता है। इसके बाद योग्य उम्मीदवारों में से चयन किया जाता है।

यानी चीफ सिलेक्टर बनने की प्रक्रिया सीधे किसी एक पूर्व क्रिकेटर को पद देने तक सीमित नहीं होती। उम्मीदवार की क्रिकेट उपलब्धियों, अनुभव और निर्धारित पात्रताओं को ध्यान में रखकर प्रक्रिया आगे बढ़ती है।

अजीत अगरकर कैसे बने चीफ सिलेक्टर?

अजीत अगरकर का क्रिकेट करियर काफी लंबा और प्रभावशाली रहा है। उन्होंने भारत के लिए तीनों फॉर्मेट में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेला। अगरकर ने 26 टेस्ट, 191 वनडे और 4 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

वनडे क्रिकेट में उनके नाम 191 मैचों में 288 विकेट और 1,269 रन दर्ज हैं। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने 26 मैच खेलते हुए 58 विकेट हासिल किए। टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उन्होंने भारत के लिए 4 मुकाबले खेले और 3 विकेट लिए।

अगरकर ने 2013 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया था। इसके करीब एक दशक बाद जुलाई 2023 में उन्हें भारतीय पुरुष सीनियर चयन समिति का चेयरपर्सन नियुक्त किया गया।

उनका अनुभव सिर्फ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक सीमित नहीं रहा। संन्यास के बाद भी उन्होंने क्रिकेट प्रशासन और टीम से जुड़े अलग-अलग स्तरों पर काम किया। इससे उन्हें खिलाड़ियों के चयन और टीम संयोजन को समझने का अतिरिक्त अनुभव मिला।

चीफ सिलेक्टर की असली जिम्मेदारी क्या होती है?

चीफ सिलेक्टर का पद सिर्फ खिलाड़ियों की सूची तैयार करने तक सीमित नहीं है। चयन समिति को अलग-अलग फॉर्मेट के लिए टीम की जरूरत समझनी होती है।

टेस्ट टीम के लिए खिलाड़ियों की तकनीक और लंबे समय तक प्रदर्शन की क्षमता महत्वपूर्ण होती है। वनडे में टीम संयोजन और संतुलन अहम होता है, जबकि टी20 क्रिकेट में तेज प्रदर्शन, फिटनेस और विशेष कौशल वाले खिलाड़ियों की जरूरत होती है।

इसके अलावा खिलाड़ियों की मौजूदा फॉर्म, फिटनेस, घरेलू क्रिकेट में प्रदर्शन, अंतरराष्ट्रीय अनुभव और भविष्य की जरूरतों को भी चयन के दौरान ध्यान में रखा जाता है।

2027 वनडे वर्ल्ड कप को देखते हुए बढ़ेगी जिम्मेदारी

आने वाले समय में भारतीय चयन समिति के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में 2027 वनडे वर्ल्ड कप की तैयारी भी शामिल होगी। बड़े टूर्नामेंट के लिए टीम तैयार करने में चयनकर्ताओं को अनुभवी खिलाड़ियों और युवा प्रतिभाओं के बीच सही संतुलन बनाना होगा।

किस खिलाड़ी को लगातार मौके दिए जाएं, किस युवा खिलाड़ी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जाए और किन खिलाड़ियों को अलग-अलग फॉर्मेट में प्राथमिकता मिले—ये फैसले चयन समिति के लिए काफी महत्वपूर्ण होंगे।

कौन-कौन रह चुके हैं चीफ सिलेक्टर?

भारतीय क्रिकेट में कई पूर्व खिलाड़ी राष्ट्रीय चयन समिति की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। अजीत अगरकर से पहले चेतन शर्मा इस पद पर रहे। वहीं 2023 में शिव सुंदर दास ने अंतरिम चीफ सिलेक्टर के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई थी।

समय के साथ BCCI चयन समिति में बदलाव करता रहा है और अलग-अलग दौर में पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाती रही है।

क्या सिर्फ स्टार क्रिकेटर होना जरूरी है?

नहीं। चीफ सिलेक्टर बनने के लिए किसी खिलाड़ी का बेहद चर्चित या बड़ा स्टार होना अनिवार्य नहीं है। सबसे जरूरी बात यह है कि उम्मीदवार BCCI के पात्रता नियमों को पूरा करता हो और उसके पास निर्धारित स्तर का क्रिकेट अनुभव हो।

यही वजह है कि प्रथम श्रेणी क्रिकेट का लंबा अनुभव रखने वाला खिलाड़ी भी राष्ट्रीय चयन समिति का हिस्सा बनने की दौड़ में शामिल हो सकता है, बशर्ते वह बाकी शर्तों को पूरा करता हो।

आखिर क्यों महत्वपूर्ण है यह पद?

भारतीय क्रिकेट टीम के लिए सही खिलाड़ियों का चयन किसी भी बड़े टूर्नामेंट की सफलता की बुनियाद होता है। चीफ सिलेक्टर को मौजूदा प्रदर्शन के साथ-साथ भविष्य की टीम पर भी नजर रखनी पड़ती है।

एक युवा खिलाड़ी को सही समय पर मौका देना, अनुभवी खिलाड़ी को उचित भूमिका देना और टीम के लिए संतुलित संयोजन तैयार करना चयन समिति की सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में शामिल है।

यही कारण है कि BCCI ने इस पद के लिए अनुभव और संन्यास से जुड़े स्पष्ट नियम बनाए हैं। अजीत अगरकर का उदाहरण भी बताता है कि लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर और क्रिकेट की गहरी समझ के साथ कोई पूर्व खिलाड़ी इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी तक पहुंच सकता है।

यह भी पढ़ें: • टीम इंडिया से जुड़ी महत्वपूर्ण क्रिकेट खबरें • भारतीय क्रिकेट में चयन और बड़े टूर्नामेंटों की तैयारी से जुड़ी खबरें

BCCI चीफ सिलेक्टर से जुड़े सवाल-जवाब

सवाल: भारतीय टीम का चीफ सिलेक्टर बनने के लिए कितने साल पहले संन्यास लेना जरूरी है?

जवाब: उम्मीदवार के क्रिकेट से संन्यास लिए कम से कम पांच वर्ष पूरे होने चाहिए।

सवाल: क्या 7 टेस्ट मैच खेलने वाला खिलाड़ी पात्र हो सकता है?

जवाब: हां, 7 टेस्ट मैच खेलने का अनुभव BCCI के निर्धारित पात्रता मानकों में शामिल है।

सवाल: क्या घरेलू क्रिकेटर भी राष्ट्रीय चयनकर्ता बन सकता है?

जवाब: हां। कम से कम 30 प्रथम श्रेणी मैच खेलने वाला उम्मीदवार निर्धारित अन्य शर्तों को पूरा करने पर पात्र हो सकता है।

सवाल: अजीत अगरकर कब चीफ सिलेक्टर बने?

जवाब: अजीत अगरकर को जुलाई 2023 में भारतीय पुरुष सीनियर चयन समिति का चेयरपर्सन नियुक्त किया गया था।

सवाल: चीफ सिलेक्टर की सबसे बड़ी जिम्मेदारी क्या है?

जवाब: भारतीय टीम के लिए उपयुक्त खिलाड़ियों के चयन की प्रक्रिया का नेतृत्व करना और भविष्य की जरूरतों के मुताबिक मजबूत टीम तैयार करना इसकी प्रमुख जिम्मेदारी है।

विश्लेषण:

भारतीय क्रिकेट में चीफ सिलेक्टर की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। अब चयन केवल किसी खिलाड़ी के पिछले प्रदर्शन को देखकर नहीं किया जाता, बल्कि टीम की आने वाले वर्षों की जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाता है। तीनों फॉर्मेट में अलग-अलग तरह के खिलाड़ियों की जरूरत और लगातार बढ़ते अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैलेंडर ने चयनकर्ताओं की जिम्मेदारी और बढ़ा दी है।

2027 वनडे वर्ल्ड कप की तैयारी को देखते हुए आने वाले समय में चयन समिति के फैसले बेहद अहम होंगे। युवा खिलाड़ियों को मौका देने से लेकर अनुभवी खिलाड़ियों के भविष्य पर फैसला लेने तक कई महत्वपूर्ण निर्णय चयनकर्ताओं को करने होंगे।

अजीत अगरकर के बाद यदि BCCI किसी नए चेहरे को यह जिम्मेदारी सौंपती है तो उसके सामने भी यही चुनौती होगी कि वह वर्तमान टीम को मजबूत रखने के साथ भविष्य की टीम तैयार करे। इसलिए चीफ सिलेक्टर का पद सिर्फ सम्मान का पद नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

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